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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

गिद्ध लौट आए हैं !

            । एक।

गिद्ध  लौट  आए  हैं
बस्तियों  के  आस-पास
बहुत-से  सूखे  हुए  पेड़ों  पर
नज़र  आने  लगे  हैं
आजकल

गौरइयें  भी  आएंगी  क्या
अपने  छूटे  हुए  घोंसलों  में ?

घर  बहुत  सूना  लगता  है
सचमुच
गौरेयों  के  बिना  !

और  कौवे ?
क्या  सचमुच  आएंगे  लौट  कर
पूर्वजों  का  भोग
जुठारने  ?

                     । दो।

गिद्ध  लौट  आए  हैं
तमाम  आशंकाओं  को
दरकिनार  करते 
तमाम  असंभावनाओं  के  विरुद्ध
आगामी  पांच  वर्ष  तक
ताजो-तख़्त  सम्हालने  के  लिए

सम्भवतः 
अन्य  कोई  और  विकल्प   हो
अगली  बार 
चुनने  के  लिए … ।

                                            ( 2013 )

                                     -सुरेश  स्वप्निल

.

3 टिप्‍पणियां:

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन बदसूरत बच्चा और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

वाणी गीत ने कहा…

ठहर कर देखते हैं गिद्ध , कौए और गौरैया को ....
अभी समय परखने का है !

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

Giddh to waise bhi sir uthaye khade hain mobile towers ki shakl me jinhone bhaga diya gauraiya ko..
Dono bimb prabhavshali hain.