गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

इस बार चूकने का अर्थ...

अंत  निकट  है
एक  जन-विरोधी  सरकार  का
तुम्हारी  तैयारियां  क्या  हैं
एक  वास्तविक 
और  जनोन्मुखी  विकल्प  के  लिए  ?

समय  कम  है
और  विकल्प  सीमित
उत्तरदायित्व  असीमित  हैं

अपना  लक्ष्य  सुनिश्चित  करो
और  इतना  संघर्ष  करो
कि  आने  वाली  कई  सरकारें
तुम्हारे  नाम  से  ही  भयभीत  रहें  ....

दो  दशक  से  अधिक  समय  तक
निरंतर  अपमान
भूख,  भय,  अत्याचार
भ्रष्टाचार,  मंहगाई,  बेरोज़गारी
क्या-क्या  नहीं  सहा  तुमने  ???

ऐसा  लोकतंत्र  मत  लादो
अपने  सिर  पर
कि  फिर  भुगतना  पड़े
सदियों  तक  ....

अभी  समय  है
जो  करना  है  अभी  ही  करना  होगा
इस  बार  चूकने  का  अर्थ  है
सारी  संभावनाएं  नष्ट  कर  लेना  !

कल  शिकायत  किससे  करोगे  ?
और  किस  बात  की
अपनी  कायरता  की  ???

                                                   (2013)

                                           -सुरेश  स्वप्निल 

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