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शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

असंभव....

असंभव  है
समुद्र  की  तलहटी  को
भेद  कर
अंतरिक्ष  में  छलांग  लगाना
और  अपनी  मुट्ठी  में
चांद-तारे  क़ैद  कर  लाना

संसार  की  नवीनतम  तकनीक
और  सर्व-सक्षम  मशीनों
और  सबसे  शक्तिशाली
मनुष्य  के  लिए

यहां  तक  कि
कवि  के  मन
और  कल्पनाशक्ति  के  लिए  भी  !

आसान  है
असंभव  को  लक्ष्य  बना  कर
स्वयं  को
और  समाज  को
भ्रमित  कर  लेना  !

                                                                     (2014)

                                                             -सुरेश  स्वप्निल 

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