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गुरुवार, 7 जनवरी 2016

देहांतरण की प्रक्रिया में

बहुत समय लगता है 
देहांतरण की प्रक्रिया में 
एक सम्पूर्ण युग 
कदाचित् 
बहुत कुछ ऊग जाता है 
नि-गोड़ी भूमि में !

मसलन, वे गुलाब
जो रोक लेते हैं तुम्हें
इस राह से आते-जाते...
सच
किसी ने नहीं रोपा था उन्हें
और वे खुंबियां भी
जिन्हें नहीं देखता कोई भी

पता नहीं
कितनी सारी संवेदनाएं
दबा जाते हैं
मिट्टी डालने वाले ...

देखो ! 
तुम जब गुज़रो इस राह से 
गाहे-बगाहे 
थोड़ी-थोड़ी मिट्टी डालते रहना 
और संभव हो तो 
कुछ पानी भी 

हां, मगर आंसू नहीं...

आंसू ख़त्म कर देते हैं 

सारी उर्वरता 
और सारी संभावनाएं 
नई नस्लों के जन्म की !
(2016)
-सुरेश स्वप्निल